इस संग्रह में नौ ग्रहों को अलग और सामूहिक रूप से प्रणाम है। मूल मंत्र, गायत्री-रूप और प्रणाम श्लोक अलग प्रकार के पाठ हैं। सम्बन्ध ज्योतिष की भक्ति-भाषा का भाग हैं, बीमारी, कर्ज या विवाद के वैज्ञानिक कारण का दावा नहीं।
पहले ग्रह की पहचान और अर्थ पढ़ें। राशि या डर पैदा करने वाली भविष्यवाणी से उपाय स्वयं तय न करें। जिम्मेदार मार्गदर्शन अनिश्चितता समझाए और बिना भुगतान वाले विकल्प की जगह रखे।
प्रारम्भिक सम्पादकीय संस्करण · परम्परागत पाठ और उच्चारण की विशेषज्ञ समीक्षा लंबित है।
ॐ आङ्गिरसाय विद्महे दण्डायुधाय धीमहि।
गुरु बृहस्पति से विवेक और मार्गदर्शन की प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ सौम्यरूपाय विद्महे वाणेशाय धीमहि।
बुध देव से बुद्धि, संवाद और विवेक की प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ शुं शुक्राय नमः॥
शुक्र ग्रह का पारम्परिक मन्त्र-स्मरण।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक मंत्रॐ सोम सोमाय नमः॥
चन्द्रदेव का पारम्परिक स्मरण।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗नाम-स्मरणॐ चन्द्राय नमः॥
चन्द्रदेव को प्रणाम।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ शं शनैश्चराय नमः॥
शनिदेव का पारम्परिक मन्त्र।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकनीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
शनिदेव को प्रणाम करने की पारम्परिक स्तुति।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ अं अंगारकाय नमः॥
मंगल ग्रह का पारम्परिक मन्त्र-स्मरण।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ रां राहवे नमः॥
राहु का पारम्परिक मन्त्र।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ कें केतवे नमः॥
केतु का पारम्परिक मन्त्र।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ बृं बृहस्पतये नमः॥
देवगुरु बृहस्पति का पारम्परिक मन्त्र।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ बुं बुधाय नमः॥
बुध ग्रह का पारम्परिक मन्त्र।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकहिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
शुक्राचार्य को प्रणाम करने की पारम्परिक स्तुति।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकजपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।
प्रकाश देने वाले सूर्यदेव को पारम्परिक प्रणाम।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकदधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
चन्द्रदेव को प्रणाम करने की पारम्परिक स्तुति।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि।
मंगल ग्रह से शक्ति और उचित दिशा की पारम्परिक प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकप्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
बुधदेव को पारम्परिक प्रणाम।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकदेवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।
देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान और मार्गदर्शन के प्रतीक के रूप में प्रणाम।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ भृगुपुत्राय विद्महे विन्देशाय धीमहि।
शुक्र ग्रह से विवेक और शुभ दिशा की पारम्परिक प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ सूर्यात्मजाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि।
शनिदेव का ध्यान करते हुए उचित मार्गदर्शन की प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि।
राहु से सम्बद्ध पारम्परिक गायत्री प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ गदाहस्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि।
केतु से सम्बद्ध पारम्परिक गायत्री प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗मार्गदर्शन अनुशंसितॐ घृणि सूर्याय नमः॥
सूर्यदेव का पारम्परिक मन्त्र-स्मरण।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकआदित्याय च सोमाय मङ्गलाय बुधाय च।
सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—नवग्रहों को सामूहिक प्रणाम।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗नहीं। नवग्रह प्रणाम नौ ग्रहों को साथ स्मरण करता है। उसे पढ़ना जन्मपत्री के आधार पर उपाय की सलाह नहीं है।
नाम-स्मरण में एक नाम याद किया जाता है। निर्धारित जप में परम्परा के नियम हो सकते हैं। हर पाठ की श्रेणी पढ़ें और अपरिचित विधि के लिए मार्गदर्शन लें।
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