शरण की भाषा कठिनाई में सहारे की प्रार्थना है। हनुमान, नरसिंह और दुर्गा के पाठ इसे अलग ढंग से व्यक्त करते हैं। हर विपत्ति को सही जप से रोकना आपकी जिम्मेदारी नहीं बन जाता।
जोखिम में व्यावहारिक सहायता लें। सुरक्षा की योजना के साथ प्रार्थना करें, विश्वास की परीक्षा की तरह नहीं।
प्रारम्भिक सम्पादकीय संस्करण · परम्परागत पाठ और उच्चारण की विशेषज्ञ समीक्षा लंबित है।
ॐ श्री हनुमते नमः॥
श्री हनुमान जी को प्रणाम।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकमनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
शक्ति, संयम और बुद्धि के प्रतीक हनुमान जी की शरणागति की प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗नाम-स्मरणॐ नमो भगवते नरसिंहाय॥
भगवान नरसिंह को प्रणाम।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकउग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
भगवान नरसिंह के रक्षक और शक्तिशाली स्वरूप की स्तुति।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗पारम्परिक प्रार्थना / श्लोकसर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भय और कठिन समय में माँ दुर्गा से शरण और साहस की प्रार्थना।
अर्थ और अभ्यास पढ़ें ↗नहीं। कठिनाई के लिए जप संख्या या उच्चारण के आधार पर स्वयं या दूसरों को दोष न दें।
नाम-स्मरण में एक नाम याद किया जाता है। निर्धारित जप में परम्परा के नियम हो सकते हैं। हर पाठ की श्रेणी पढ़ें और अपरिचित विधि के लिए मार्गदर्शन लें।
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